21/07/2023
एक हाई कोर्ट का फ़ैसला एक समुदाय के लिए , और दूसरा समुदाय सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाए पहले समुदाय को सड़क पर मारना प्रारंभ कर देता है, ( faisala kya tha wo bhee likh rha hu - मणिपुर हिंसा का मूल कारण है मतांतरण ( Conversion ) जिसके कारण मतांतरित हो ईसाई बने कूकी समाज में मैतेई के प्रति नफ़रत बढ़ती गई क्योंकि हिन्दू मैतेई/मैती समाज उनके 100% ईसाई मणिपुर बनाने की राह में बाधा बन रहा है।
हिन्दू मैतेई समाज को मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा जनजाति का दर्जा दिए जाने के निर्णय के विरूद्ध कूकी के ईसाई समाज द्वारा दंगे की शुरुआत की गई जिसके कारण मैतेयी और कूकी दोनों समाज की महिलाएं , बूढ़े , बच्चे स्वाभाविक रूप से दंगाइयों के निशाने पर हैं। ऐसा हर दंगे में होता है।
मणिपुर के मात्र 10% भूभाग पर 50% से भी ज्यादा जनसंख्या वाले मैतेई/मैती से उनका अधिकार छीनने की कोशिश दशकों से जारी है। आस-पास के प्रदेशों से ईसाई बन चुकी जनजातियों को जानबूझकर एक षड्यंत्र के तहत मणिपुर में बसाया गया। 1961 से 2011 की जनगणना में हुए बदलाव से इसे स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।)
सवाल यह भी है कि उच्च न्यायालय के निर्णय से असहमत कुकी समूह ने सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय हिंसा का रास्ता क्यों चुना?
इस पर सारे देश के तथाकथित सेकुलर चुप रहे और जब दूसरा समुदाय पलटवार कर दिया तो फिर सारे ढोंगी तथाकथित सेकुलर जमात ने भोकना शुरू कर दिया ।
केंद्र सरकार कैसे भी बदनाम हो उसी की कोशिश थी कल की घटना।
दो महीने पहले के घटना का मानसून सत्र से पहले वीडियो रिलीज़ करना उसी की एक कड़ी थी।
विपक्ष के एक नेता गए थे वहाँ सबसे मिलकर आए तब क्यों नहीं बताया। मणिपुर का जो मूल निवासी हैं
वो मतई समाज है ।
जिस पर कुकी क़ब्ज़ा कर रहे हैं।