12/08/2025
बिहार में गवाही से कतराने वाले पुलिसकर्मी होंगे निलंबित, DGP का सख्त आदेश - DGP VINAY KUMAR
बिहार में अपराध पर कैसे लगाम लगाया जाए इसको लेकर लगातार एक्शन हो रहा है. इसी कड़ी में डीजीपी ने सख्त आदेश दिया है.
पटना : बिहार में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सख्ती का मन बना लिया है. अब अगर कोई भी पुलिसकर्मी अदालत में गवाही देने से कतराएगा या अनावश्यक विलंब करेगा, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी. यह फैसला खुद बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने लिया है. उनका कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य कन्विक्शन रेट (दोषसिद्धि दर) को बढ़ाना है, ताकि अपराधियों को समय पर सजा मिल सके और वे बेल पर बाहर आकर दोबारा अपराध न कर सकें.
''हाल के दिनों में कई मामलों में पुलिसकर्मी समय पर कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे. जिसके कारण मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई और आरोपी आसानी से जमानत पर छूट गए. ऐसे मामलों में पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की, जिसके बाद सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं.''- विनय कुमार, डीजीपी, बिहारविनय कुमार का बयान (ETV Bharat)
गवाही में लापरवाही पर सख्त सजा : पुलिस मुख्यालय ने साफ निर्देश दिया है कि अगर कोई पुलिसकर्मी पहली बार गवाही में बिना उचित कारण के अनुपस्थित रहता है, तो उसकी वेतन रोक दी जाएगी. वहीं, दूसरी बार भी अगर वह कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचा, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी, जिसमें निलंबन तक शामिल है.
'बेल मिलने से बढ़ता है अपराध' : डीजीपी विनय कुमार का मानना है कि गवाही में लापरवाही सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था पर असर डालती है. जब पुलिसकर्मी समय पर गवाही नहीं देते, तो आरोपी को बेल मिलने की संभावना बढ़ जाती है. बेल पर बाहर आने के बाद वही आरोपी अक्सर फिर से गंभीर अपराधों को अंजाम देते हैं, जिससे जनता में असुरक्षा की भावना पैदा होती है.कानून-व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम : बिहार में अपराध नियंत्रण के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है. पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी, एसएसपी और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश भेजा है कि गवाही से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में तो विशेष निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि संगठित अपराध और बेल पर छूटे अपराधियों पर सख्ती की जा सके.
'कन्विक्शन रेट में सुधार होगा' : पुलिस मुख्यालय को उम्मीद है कि इस सख्ती से न सिर्फ कन्विक्शन रेट में सुधार होगा, बल्कि अपराधियों के मन में भी कानून का डर कायम होगा. साथ ही, यह कदम उन पीड़ितों के लिए भी भरोसे का संदेश होगा, जो न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं.आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में 1,28,211 गवाहों ने अदालत में जाकर अपनी गवाही दी, जबकि पूरे पिछले वर्ष यह संख्या 1,16,000 थी. यानी इस सख्ती का असर दिखने लगा है. डीजीपी का यह आदेश बिहार पुलिस के लिए एक स्पष्ट संदेश है. गवाही में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी और अपराधियों को समय पर सजा दिलाने के लिए पुलिस को हर संभव प्रयास करना होगा. खबर आर्यावर्त तक